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क्यों निपटे पांढुर्ना एसपी : किसानों का सीएम के काफिले के रास्ते के आना महंगा पड़ा !

महिला सब इंस्पेक्टर के साथ संबंधों को लेकर चर्चाओं में रहे

4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री का काफिला रोका था किसानों ने

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 4 अक्टूबर को पांढुर्णा आए थे और उनके वापस लौटने के दो दिन बाद ही 6 अक्टूबर को पांढुर्णा एसपी का तबादला कर दिया गया। आखिर क्यों.. अब पांढुर्णा जिले की जनता इस सवाल का जवाब तलाशने में लगी हुई है। कि आखिर मुख्यमंत्री के दौरे के ठीक 2 दिन बाद ही एसपी को क्यों हटाया गया। कई तरह के कयाश लगाए जा रहे हैं। लेकिन इसके पीछे का एक कारण है जो की साफ तौर पर दिखाई देता है। और वह कारण है सीएम के पांढुर्णा दौरे के की समाप्ति के बाद जब वे वापस लौट रहे थे। इसी दौरान क्षेत्र के किसान अपने हाथों में मुरझाई हुई फसले लेकर उनके काफिले के सामने आ गए। किसानों को देखकर मुख्यमंत्री को अपने वाहन से उतरना पड़ा और किसानों से बात करनी पड़ी।

लेकिन कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री को या बात नागवार गुजरी की वापसी के दौरान पुलिस व्यवस्था में ऐसी चूक क्यों हुई की किसान काफिले के सामने आकर खड़े हो गए। अब इस बात को कई तरह से देखा जा सकता है। लेकिन जहां तक मुख्यमंत्री के दौरे का पूरा निचोड़ निकला जाए तो एक यही घटना थी। जिसमें पीड़ित किसान उनके सामने आकर खड़े हुए और क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने और फसलों का बेहतर मुआवजा देने की मांग की। इस बात का ठीकरा एसपी पांढुर्णा पर फूटा और 2 दिन में ही एसपी को पीएचक्यू अटैच कर दिया गया। हालांकि उनके स्थान पर आईपीएस विदिता धनकड़ को पांढुर्णा एसपी बनाया गया है।

क्या किसानों का सीएम को रोकना इतनी बड़ी सुरक्षा चूक ?

क्या सीएम के काफिले को पीड़ित किसानों के द्वारा रोकना सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक थी कि एसपी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यह बात समझ से परे है। क्योंकि छिंदवाड़ा- पांढुर्णा जिले में इस साल बारिश कम हुई है और फसलों को अच्छा खासा नुकसान भी हुआ है। किसान खरीफ की फसल ठीक से नहीं निकाल पाए। खासतौर से पांढुरना जिले में कपास और संतरे जैसी फैसले बर्बाद हुई है। और अब रबी के सीजन में पानी की कमी होने वाली है। इसके लिए तो कृषि विभाग ने गाइडलाइन तक जारी कर दी है कि किसान ज्यादा पानी वाली फैसले न लगाएं। ऐसी फसले लगाएं जिसमें कम से कम पानी की आवश्यकता हो। इन हालात में प्रदेश के मुखिया के सामने अपनी समस्या रखना क्या इतनी बड़ी सुरक्षा चूक साबित हो सकती है कि एसपी को तत्काल हटाया गया। यह बात क्षेत्र के किसान और आमजन सभी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि एसपी को हटाना अन्य प्रशासनिक कारणों से भी हो सकता है। लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान किसी ने भी एसपी की शिकायत नहीं की जिससे कि उन्हें हटाया जाए।

महिला सब इंस्पेक्टर के साथ संबंधों की चर्चा ने जोर पकड़ा

पांढुर्णा एसपी प्रकाश चंद्र परिहार अपने 6 -7 महीने के छोटे से कार्यकाल में ज्यादा चर्चाओं में तो नहीं रहे । क्योंकि यहां माफिया को खुली छूट मिली हुई थी । रेत माफिया हो, शराब माफिया हो, तंबाकू माफिया हो या नशे के डीलर हो सभी शांति से अपना काम कर रहे थे। लेकिन पिछले दिनों पांढुर्णा एसपी तथा कथित रूप से एक महिला सब इंस्पेक्टर के साथ संबंधों को लेकर चर्चाओं में रहे। विभागीय कर्मचारियों और लोगों के बीच इन संबंधों को लेकर चर्चा चलती रही। हालांकि एसपी के तबादले के बाद इन चर्चाओं ने और ज्यादा जोर पकड़ा है। क्योंकि एसपी के साथ ही संबंधित महिला सब इंस्पेक्टर को भी पांढुर्णा जिले से स्थानांतरित कर नरसिंहपुर भेज दिया गया है। हालांकि ऐसे किसी संबंध की पुष्टि नहीं हो सकी है।

पुलिसकर्मी थे परेशान, छुट्टी लेते ही हो जाती थी पोस्टिंग रद्द

पांढुर्णा एसपी प्रकाश चंद्र परिहार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा परेशान जिले के पुलिस कर्मचारी थे। इसका कारण यह है कि पुलिस कर्मचारियों को छुट्टी लेने के लिए भी 50 बार सोचना पड़ता था। एसपी के साथ निर्देश थे की जो भी पुलिसकर्मी छुट्टी लेगा उसको वापस आने पर थाने में नहीं बल्कि पुलिस लाइन में आमद देनी पड़ेगी। और उसकी पोस्टिंग रद्द कर दी जाएगी। ऐसे कई आदेश एसपी के कार्यकाल में हुए । जिसमें पुलिसकर्मी ने छुट्टी ली और उसकी पोस्टिंग रद्द कर दी गई। जबकि छुट्टी लेना प्रत्येक शासकीय कर्मचारी का अधिकार है लेकिन एसपी के तुगलकी आदेश के कारण पुलिसकर्मी परेशान थे।

पांढुर्णा डायरी… Avinaash Siingh
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