शाम 5 बजे से अंजुमन मार्केट के सामने जमा हो रही थी भीड़
हमले से 5 मिनट पहले कहां और क्यों गायब हुआ मोनू लाला ?
छिंदवाड़ा। 10 जुलाई की रात 8:30 बजे कर्बला चौक में हुआ विवाद कोई मामूली विवाद नहीं था। बल्कि एक तरह से यह गैंगवार था। जिसमें मोहित वकील की हत्या की साजिश रची गई थी। इस घटना के बाद एक के बाद एक परतें खुलती जा रही है। दरअसल घटना की शाम से ही हमलावर जमा होने लगे थे। पहले मोहित वकील के कार्यालय के सामने अंजुमन मार्केट में भीड़ जमा हुई। जिसकी जानकारी मोहित वकील ने 112 नंबर पर डायल कर पुलिस को भी दी थी। लेकिन पुलिस नहीं पहुंची तब तक यह साफ हो चुका था कि आज हमला होगा। रात 8:30 बजे इस वारदात को अंजाम भी दिया गया । कर्बला चौक में जिस जगह पर हमला हुआ वहां पर मोहित वकील के साथ तीन लोग मौजूद थे मोहित खुद उसका चचेरा भाई और मोहिद लाला यह तीनों हमले के पहले तक कर्बला चौक में मौजूद थे ।
इसी दौरान हमला होता है और मोहित वकील और उसके चचेरे भाई पर वार किए जाते हैं। अचानक यह हमला गैंगवार में बदल जाता है। हालांकि मौके पर मोहित वकील और उसका भाई 50-60 लोगों की भीड़ से अकेले लड़ते हैं। और वहां से भाग खड़े होते हैं। भीड़ उनके घर पहुंचती है और पथराव करती है। दोनों युवक घर न जाकर कहीं और छुप जाते हैं और अपनी जान बचाते हैं। यह नजारा कर्बला चौक से लेकर मोहित वकील के घर तक लोग देखते हैं। सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात कैद होती है उसके बाद भी कार्रवाई पर सवाल उठ जाते हैं।
सरपरस्ती बन सकती है शहर के लिए खतरा…👇
हमले से पहले कहा गायब हो गया मोहिद उर्फ मोनू लाला ?
10 जुलाई शुक्रवार की रात 8:30 बजे तक मोहित वकील उसका चचेरा भाई और मोहिद उर्फ मोनू लाला कर्बला चौक में एक साथ मौजूद थे। तीनों को इस बात का अंदेशा भी था कि उनके ऊपर हमला हो सकता है। हालांकि पूरी कहानी में मोहिद उर्फ मोनू लाल का ज्यादा रोल नहीं है। लेकिन हमले से ठीक पहले अचानक मोनू लाला गायब हो जाता है। यह बात बड़ी सोचने वाली की एक गैंगवार जिसमें हमला होने की पूरी आशंका है। और कहीं ना कहीं मोहित वकील उसका चचेरा भाई और मोनू लाला इस बात के इंतजार में भी है कि उन पर हमला हो सकता है। अचानक हमले से ठीक 5 मिनट पहले मोहित उर्फ मोनू लाला गायब हो जाता है । जब हमला होता है तो वहां पर केवल मोहित वकील और उसका चचेरा भाई ही मौजूद रहते थे। उन पर हमला होता है जिसका पलटवार दोनों भाई करते हैं।आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को घायल कर देते हैं।
हालांकि यह भी सच है की दोनों भाई वहां से भागते नहीं तो उनकी हत्या भी की जा सकती थी। क्योंकि हमलावरों की संख्या 50 – 60 से ज्यादा थी और जो वीडियो वायरल हुआ उसमें तो 100 – 200 की भीड़ दिख रही है। लेकिन सवाल है कि मोनू लाला आखिर हमले से ठीक 5 मिनट पहले कहां गायब हुआ। हालांकि पुलिस की एफआईआर में मोहित वकील उसके चचेरे भाई और मोहिद लाला तीनों का नाम है। लेकिन गोंडवाना ने गुरुवार को दिए अपने ज्ञापन में दावा किया है की मोहिद उर्फ मोनू लाला घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था। और यह बात सीसीटीवी कैमरा में नजर आ रही है।
पुलिस ने एफआईआर में भ्रमण के दौरान सूचना की बात लिखी
कर्बला चौक गैंगवार में पुलिस की भूमिका बड़ी संदिग्ध है। पहले तो पुलिस दो युवकों पर हमले की वारदात में भीड़ को मामूली धाराएं लगाकर छोड़ देती है। और जिन युवकों पर हत्या के इरादे से हमला किया गया उन्हीं युवकों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करती है। इससे भी बड़ी संध्यास्पद बात कोतवाली थाने में दर्ज हुई है एफआई में नजर आती है। इस एफआईआर को कोतवाली थाने के एएसआई धर्मराज वाघमारे ने दर्ज किया। उन्होंने एफआईआर में लिखा कि थाना क्षेत्र के पैदल भ्रमण के दौरान पुलिस अधिकारी को यह पता चला कि किसी हमले में एक युवा गंभीर रूप से घायल होकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस सूचना के आधार पर पुलिस अधिकारी महोदय जिला अस्पताल पहुंचे और वहां उन्होंने घायल जुनैद की शिकायत पर मोहित वकील उसके चचेरे भाई और मोहिद लाला सहित आठ नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। अब बड़ी बात यह है कि जब कर्बला चौक में एक डेढ़ घंटे तक तांडव चला तो यह बात पुलिस तक क्यों नहीं पहुंची। जबकि डीआईजी कार्यालय और यातायात थाना घटनास्थल से महज 100 मीटर की दूरी पर मौजूद हैं। यह बात बड़ी चिंताजनक है की शहर में गंभीर वारदात होती है और पुलिस को भनक तक नहीं लगती। पुलिस को इसकी जानकारी एक घायल के अस्पताल पहुंचने के बाद लगती है।
Next Episode : क्या है गंगवार का ड्रग्स, क्रिकेट सट्टा, रेस्टोरेंट और नागपुर कनेक्शन।
गैंगवार…Second Episode..
Avinaash Siingh
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