करबला चौक पर खुलेआम दंगा, बलवा और जानलेवा हमला
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, अपराधियों को बढ़ावा
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा शहर में 10 जुलाई की रात 8:30 बजे घटी एक वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और शहर में ऊग रही अपराधियों की नई पौध के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह विवाद इतना बड़ा है कि इसकी चर्चा आज शहर के हर कोने में हो रही है। ऐसा लगता है जैसे हाल ही में रिलीज हुई धुरंधर फिल्म में जो लेयारी दिखाया गया है। वैसा ही लेयारी छिंदवाड़ा में भी तैयार हो रहा है। जहां क्रिकेट सट्टे के कारोबार से लेकर एमडी ड्रग्स और नशे के कई कारोबार में युवा लिप्त हैं। इस मिनी लेयारी के हर धुरंधर के पास घातक हथियार मौजूद है। इस मिनी लेयारी क्षेत्र के लोग इन धुरंधरों से खौफ खाते हैं। बेखौफ आधी रात तक और धुरंधरों का आतंक क्षेत्र में चलता है।
हमारा सिस्टम तमाशबीन बना अपराधियों की तीमारदारी करता दिखाई देता है। दरअसल यह बातें हवा हवाई नहीं है। बल्कि 10 जुलाई की रात शहर के बीचो-बीच कर्बलाचौक में रात 8:30 बजे लगभग 50 लोगों के एक गैंग ने दो युवकों पर हमला किया और जमकर हथियार चले। यह तांडव लगभग 1 घंटे तक चलता रहा। इन दो युवकों ने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई और वहां से भाग खड़े हुए। लेकिन दंगाई फिर भी नहीं माने वे युवकों के पीछे उनके घर पहुंचे और वहां पर भी हमला किया । जबकि दोनों युवक अपने घर में मौजूद नहीं थे वह कहीं और छुपे हुए थे।
वीडियो में देखें घटना का सच…👇
यह घटना मुस्लिम समुदाय के दो पक्षों के बीच हुए विवाद की है। लेकिन इस वारदात में जब 50 से ज्यादा बलवाइ आतंक मचा रहे थे। उस समय इन बलवाइयों में अकेले मुसलमान नहीं थे। बल्कि छोटी बाजार, छापाखाना, लालबाग जैसे क्षेत्र के कई असामाजिक तत्व भी इन बलवाइयों में शामिल थे। लेकिन असल किसका यह नहीं की कैसे एक वारदात घटित होती है। मामला थाने पहुंचता है और फिर जो होता है उससे यह दिखाई दे रहा है की कहीं ना कहीं शहर में मिनी लेयारी तैयार करने में पुलिस और सफेदपोश सरपरस्ती का भी हाथ है।
घायल युवकों पर पुलिस ने लगाया हॉफ मर्डर का केस !
दरअसल इस वारदात के बाद शहर के हालात पर सोचने की आवश्यकता इसलिए पड़ी की एक वारदात घटित होती है। इस वारदात के सत्यता पर काम करने की बजाय पुलिस एक पक्ष को फायदा पहुंचती दिखाई देती है। जिन युवकों पर हमला हुआ उनकी हालत खराब थी। क्योंकि 50 से ज्यादा लोग एक साथ उन पर टूट पड़े थे। यह दोनों युवक जो आपस में चचेरे भाई हैं। वे बलवाइयों के हथियार छुड़ाकर पटवार नहीं करते तो किसी न किसी की हत्या हो चुकी होती। लेकिन जब मामला पुलिस में पहुंचता है। तो इन दोनों भाइयों पर हाफ मर्डर का केस पुलिस दायर करती है।
इतना ही नहीं घटना स्थल पर केवल दो भाई मौजूद थे। जिन पर हमला हुआ लेकिन पुलिस की एफआईआर में नौ लोगों के नाम दर्ज है। और अन्य भी शामिल है ऐसा लिखा गया है। और इन दोनों भाइयों के साथ-साथ नामजद लोगों के खिलाफ भी बलवा और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। लेकिन वही इसके उलट जिन लोगों ने हमला किया उन पर केवल मामूली धाराएं लगाई गई। बलवा तो पुलिस ने लगाया है लेकिन जिन लोगों ने वास्तव में हत्या का प्रयास किया उन पर हाफ मर्डर की धारा नहीं लगाई गई। यह सवाल अब बहुत बड़ा हो गया है कि आखिर इन बलवाइयों पर शहर के किस सफेद पोश का हाथ है की पुलिस को भी अपने कार्रवाई में मैनिपुलेशन करना पड़ा।
क्राइम बिहाइंड द सीन… First Episode… Avinaash Siingh
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