DPS की मनमानी चरम पर, स्कूल में ही खोल लिया रेस्टारेंट
बच्चों के टिफिन में हेल्थी फूड का मेन्यू, खा रहे जंक फूड
छिंदवाड़ा। प्राइवेट स्कूलों ने शिक्षा को एजुकेशन इंडस्ट्री में बदल दिया है। हर तरह से बच्चों और बच्चों के अभिभावकों से रुपयों की उगाही कर रहे हैं। अब तक आपने अनुभव किया होगा की स्कूलों में मोजा , टाई, यूनिफॉर्म, जूता यहां तक की सर्दियों में बच्चों के कोर्ट और अन्य गर्म कपड़े के साथ-साथ पुस्तक- कॉपी में स्कूल का लोगो लगाकर रुपयों की उगाई की जा रही है। यह एजुकेशन इंडस्ट्री कुल मिलाकर पढ़ाई के नाम पर बच्चों के अभिभावकों की जेब में डकैती डाल रहे हैं। लेकिन डीपीएस स्कूल इससे कहीं आगे बढ़ गया है। अन्य स्कूलों में तो पाठ्य सामग्री और स्कूल में काम आने वाली वस्तुओं पर ज्यादा पैसा वसूल कर अभिभावकों की जेब खाली की जा रही है। लेकिन डीपीएस स्कूल ने तो सारी हदें पार करते हुए स्कूल में ही कैफेटेरिया खोल दिया है। अब हायर क्लासेस के बच्चों को स्कूल के बाहर कैफेटेरिया में बैठकर मस्ती करने की जरूरत नहीं है। बल्कि वह स्कूल के अंदर ही बाकायदा घंटों कैफेटेरिया में बैठ सकते हैं।
इतना ही नहीं यह कैफेटेरिया छोटे बच्चों से लेकर बड़े बच्चों तक को जंक फूड की सप्लाई कर रहा है। जहां एक तरफ स्कूलों में बच्चों के टिफिन में हेल्दी फूड लाने के लिए प्रेरित किया जाता है। और बाकायदा कई स्कूलों में तो टिफिन के मैन्यू फिक्स हैं। लेकिन यहां तो हेल्दी फूड का नाता दूर-दूर तक नहीं है। स्कूल खुद ही बच्चों को जंक फूड उपलब्ध करा रहा है। हालांकि यह भी डीपीएस स्कूल के रुपयों की उगाही करने का एक तरीका है। जिसके लिए बाकायदा एक सिस्टम बनाया गया है। ताकि बच्चे आसानी से इस कैफेटेरिया से जंक फूड ऑर्डर कर सके। और अपने लंच में बुला सके, इस कैफेटेरिया में बैठकर गप्पे लड़ा सके।
कैफेटेरिया में कैशलेस फैसिलिटी, चलता है प्रिपेड कार्ड
डीपीएस स्कूल ने अपने परिसर में एक कैफेटेरिया खोला है। यह कैफेटेरिया पिज़्ज़ा, बर्गर सहित कई जंक फूड बच्चों को उपलब्ध करा रहा है। इसके लिए बाकायदा डीपीएस स्कूल ने एक सिस्टम बनाया है। जिन बच्चों को कैफेटेरिया का उपयोग करना है। उन बच्चों के लिए 500 रुपए का एक प्रीपेड कार्ड लांच किया गया है। बाकायदा बच्चों को इस बात का लालच दिया जाता है। कि वह अपने परिजनों से कहकर 500 रुपए का प्रीपेड कार्ड बनवाएं। और इस कार्ड के जरिए स्कूल के कैफेटेरिया से बच्चे फूड ऑर्डर कर सकते हैं। लंच टाइम के आधे घंटे पहले फूड ऑर्डर करना होता है। जबकि कैफेटेरिया में बैठकर खाना हो तो तत्काल आर्डर हो जाता है।
बच्चा जितना भी ऑर्डर करता है। उसकी कीमत इस 500 रुपए के प्रीपेड कार्ड से कटती है। अब यह बच्चे के ऊपर है कि वह 500 रुपए का प्रीपेड कार्ड पूरा महीना चलाएं, या 5 दिन में खत्म कर दे। स्कूल के द्वारा रुपयों की उगाही करने का यह नया तरीका देखने को मिला है। छिंदवाड़ा में अब तक ऐसा कोई कैफेटेरिया किसी स्कूल में नहीं है। केवल डीपीएस स्कूल में सुविधा उपलब्ध हो रही है। बच्चे भर भर कर जंक फूड खा रहे हैं। इसके अलावा कैफेटेरिया में बैठने की जो सुविधा दी गई है वह तो गजब ही है। मतलब बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ गप्पे मारने का भी पूरा अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। यहां हर महीने डीपीएस स्कूल इस कैफेटेरिया से लाखों रुपए कमा रहा है।
प्रीपेड कार्ड से सालाना 50 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई
डीपीएस स्कूल में बड़े सोच समझकर स्कूल परिसर में कैफेटेरिया खोला है। वर्तमान में डीपीएस स्कूल में 800 से 1000 बच्चे पढ़ रहे हैं । इनमें से 800 बच्चों ने भी हर महीने प्रीपेड कार्ड रिफिल कराया तो स्कूल को लगभग चार लाख रुपए का मुनाफा होगा । लेकिन बच्चे यह 500 रुपए पूरा महीना नहीं चला पाएंगे। बच्चे खाने-पीने के शौकीन होते हैं । और जब स्कूल में ही उन्हें उनका फेवरेट जंक फूड मिल रहा है तो फिर यह 500 रुपए पूरा महीना नहीं चल पाएगा । इसका मतलब साफ है की डीपीएस स्कूल इस रेस्टोरेंट से चार से 5 लाख से ज्यादा की कमाई हर महीने कर रहा है। 10 महीने में यह कमाई 50 लाख से ऊपर की है। डीपीएस बच्चों की स्कूल फीस, डोनेशन और ट्यूशन फीस के नाम पर तो करोड़ों रुपए कमा ही रहा है। लेकिन उसके अलावा परिजनों की जेब ढीली करने का यह एक नया तरीका स्कूल में निकला है।
इस कैफेटेरिया से स्कूल को तो लाखों रुपए का फायदा हो रहा है। लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बच्चे जिन्हें जंक फूड खाने से रोका जाता है, या ज्यादातर घरों में बच्चों को हफ्ते में केवल एक दिन बाहर का खाना खाने की छूट होती है । ताकि बच्चों की सेहत पर इसका बुरा असर न पड़े। लेकिन यहां तो स्कूल में ही हर दिन जंक फूड मिल रहा है। बच्चों के हाथ में कैश न सही लेकिन एक कैशलेस व्यवस्था कर दी गई है। जिसके चलते बच्चे हजारों रुपए का खाना इस कैफेटेरिया से खा रहे हैं । इस बात की खबर न ही जिला प्रशासन को है। न जिला शिक्षा विभाग को है और ना ही फूड एडल्टरेशन डिपार्टमेंट को है । की स्कूल में बाकायदा बच्चों को जंक फूड बेचा जा रहा है।
Episode 3 – स्कूल में टीचर सिखा रहे अल्लाह की इबादत करना ।
Episode 4 – पढ़ाई और स्पोर्ट्स भगवान भरोसे, इलीट्रेट फैकल्टी।
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