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नेताजी की शराब दुकान : नाला मद की जमीन, निगम और राजस्व कर रहे किनारा !

नाले के रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम की

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोकना भी निगम का काम

छिंदवाड़ा। सरकारी जमीन पर कब्जा कर शराब दुकान खोलने के मामले में नगर निगम और राजस्व विभाग दोनों ही किनारा करते नजर आ रहे हैं। नगर निगम इस जमीन को राजस्व की बता रहा है। हालांकि यह जमीन जिस पर अतिक्रमण किया जा रहा है वह राजस्व रिकॉर्ड में नाला मद की जमीन में दर्ज है। इसका मतलब साफ है कि यह जगह सरकारी है जिस पर खुलेआम कब्जा करने की साजिश एक नेताजी के द्वारा रची गई है। इसमें कई लोग शामिल है जिन्होंने प्रशासन और नगर निगम पर प्रेशर बनाया है कि यहां से पुराने अतिक्रमण करियों की गुमटियां हटाई जाए और शराब दुकान के लिए जगह खाली कराई जाए। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि एक सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है। और यह सरकारी जमीन नगर निगम की सीमा में आती है।

हालांकि राजस्व रिकॉर्ड में नाला मद की जमीन होने के कारण इसका नाता सीधे-सीधे करीब मौजूद नाले से जुड़ जाता है। जिसके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की है। लेकिन राजस्व विभाग को भी शहर में मौजूद राजस्व की जमीनों पर अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी है। तहसीलदार और एसडीएम पटवारी और आरआई के भरोसे अपने काम का संभालते हैं। ये अधिकारी ज्यादातर मामलों में कार्यालय में बैठे नजर आते हैं। इस जमीन की जो पड़ताल दिव्य भारत समाचार ने की तो पता चला कि यह जमीन नगर निगम की नहीं है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नाला मद में दर्ज है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की है लेकिन नेताओं के आगे नगर निगम और राजस्व का अमला मूक दर्शक बना बैठा है। और खुलेआम शराब दुकान के लिए अतिक्रमण चल रहा है।

शहर में अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम की

परासिया रोड पर डी मार्ट के सामने जिस जगह पर अंग्रेजी शराब दुकान के लिए अतिक्रमण किया जा रहा है। यह जगह नगर निगम की सीमा में आती है। नगर निगम की सीमा में आने वाली किसी भी सरकारी जमीन चाहे वह राजस्व रिकॉर्ड की जमीन हो और चाहे वह नगर निगम की जमीन हो। सभी सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को रोकने की जवाबदारी नगर निगम की है। इसके लिए सीधे-सीधे कमिश्नर जवाब देह हैं। क्योंकि नगर निगम के पास एक पूरा अतिक्रमण विरोधी दस्ता मौजूद है जो शहर में अतिक्रमण हटाने और अतिक्रमण को न होने देने के लिए काम करता है।

इसके लिए नगर निगम हर महीने लाखों रुपए बर्बाद करता है। एक लाख से दो लाख तक का तो डीजल ही इस अतिक्रमण विरोधी दस्ते के द्वारा खर्च कर लिया जाता है। उस पर कर्मचारी और अधिकारियों का वेतन का खर्च भी नगर निगम उठा रहा है। लेकिन जब बात किसी नेता के द्वारा एक सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने की आती है तो नगर निगम इसे राजस्व की जमीन बता कर अपना पल्ला झाड़ता नजर आता है। कुछ ऐसे ही राजस्व विभाग के भी है यहां भी जब नेताजी के द्वारा अतिक्रमण करने की बात खुलकर सामने आई। तो अधिकारी अपनी बगलें झांकते नजर आए और पटवारी गायब नजर आए।

नेताजी ही क्यों, हर बेरोजगार भाजपा कार्यकर्ता को मिले जमीन !

नेताजी की शराब दुकान के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र एक्टिव हो गया एक सरकारी जमीन ढूंढी गई । उस पर मौजूद लगभग 20 बेरोजगारों की गुमटियां हटाकर नेताजी के लिए इस सरकारी जमीन पर शराब दुकान खोलने अतिक्रमण करने पूरी योजना तैयार कर दी गई। जब एक भाजपा नेता के लिए सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कराया जा सकता है । तो यह सुविधा सत्ता दल के हर उस कार्यकर्ता को मिलनी चाहिए जो बेरोजगार है। जिस पर अपने परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी है। इस तरह से कई बेरोजगारों को सरकारी जमीनों में अपनी गुमटियां चलाने का अवसर भी मिल जाएगा और रोजगार भी मिल जाएगा। यह एक अच्छी योजना साबित हो सकती है। इसके लिए भाजपा के बेरोजगार कार्यकर्ताओं को अपने नेताओं से जरूर संपर्क करना चाहिए ताकि उनकी रोजी रोटी का इंतजाम भी हो सके।

नेताजी की धौंस… Avinash Singh
9406725725/7697930555