मूलभूत सुविधाएं भी गायब, टैक्स 10 गुना
सरकारी जमीनों को बेचने के षड्यंत्र में अव्वल
छिंदवाड़ा। साढ़े साल पहले शहर वासियों ने कांग्रेस को नगर निगम की जिम्मेदारी सौंप थी । लेकिन भाजपा ने षडयंत्र रचकर कांग्रेस पार्षदों को अपनी तरफ में लाया और परिषद भाजपा की बना ली। महापौर खुद कांग्रेस से चुनाव जीतकर महापौर बने थे। लेकिन हवा का रुख देखकर महापौर विक्रम आहके ने भी भाजपा ज्वाइन कर ली । अब पूरी परिषद भाजपा की है, या यू कहे कि परिषद अब केवल महापौर की होकर रह गई है। क्योंकि नगर निगम छिंदवाड़ा शहर वासियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दे पा रहा है । हालांकि नगर निगम कई मामलों में अव्वल है । लेकिन यह मामले बड़े पेचीदा हैं। जैसे कि नगर निगम का कहना है कि कर्मचारियों का वेतन तक निकलना मुश्किल हो गया है । लेकिन नगर निगम में कर्मचारियों की बैक डोर एंट्री में नगर निगम पहले पायदान पर आता है ।
नगर निगम की बैठक में पक्ष विपक्ष दोनों ने घेरा 👇
शहर के कई वार्ड में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है । एक मोटर खराब होने के बाद हफ्ते भर शहर में पानी की सप्लाई बाधित होती है । लेकिन इसका कोई विकल्प नगर निगम के पास नहीं है। शहर में साफ सफाई का केवल ढिंढोरा पीटा जा रहा है । कालोनियों के हाल देख तो हर तरफ कंस्ट्रक्शन चल रहा है । और मलवा सड़क पर पड़ा हुआ है जिससे नगर निगम को कोई सरोकार नहीं है। नगर निगम के कर्मचारी कचरा उठाने वाली गाड़ी लेकर मोहल्ले में पहुंचने तो है लेकिन नगर निगम का कर्मचारी कचरा वाहन से उतरने की जहमत तक नहीं उठाता। जबकि कॉलोनी की सड़क पर जमा कचरा पड़ा रहता है । जिसे कचरा गाड़ियों में डालना है वह आए अथवा ना आए इस बात से कचरा गाड़ी के कर्मचारियों को कोई सरोकार नहीं है। की कॉलोनी में कितनी गंदगी है।
सरकारी जमीन ऐसे बेच रहे जैसे सब्जी बाजार लगा हो
नगर निगम एक और बात में अव्वल है सरकारी जमीनों की बंदर बांट करने में । नगर निगम पिछले साढे तीन साल में अव्वल साबित हुआ सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे, सरकारी जमीनों पर कॉलोनिया काटना, परतला प्रोजेक्ट को प्राइवेट सेक्टर को बेचने का षड्यंत्र रचने में नगर निगम अव्वल है। खजूरी रोड रोड प्रोजेक्ट नगर निगम की लापरवाही के कारण करोड़ों का प्रोजेक्ट बर्बाद हो गया । इसमें नगर निगम अव्वल है। अब जेल बगीचा बेचने की तैयारी चल रही है इसमें नगर निगम अव्वल है। नगर निगम 18 करोड रुपए बैंक को नहीं दे रहा ताकि बैंक इस जमीन की नीलामी कर दे । और भू माफिया साठगांठ कर जेल बगीचे की जमीन हथिया ले। शहर में सीवरेज का सिस्टम आज तक शुरू नहीं हो पाया । 8 साल में नगर निगम शहर को सीवरेज लाइन तक नहीं दे पाया । कई मामलों में नगर निगम अव्वल है लेकिन जहां बात आती है आम आदमी को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की तो नगर निगम के अधिकारी और महापौर का इस बात से कोई सरोकार नहीं है।
चार इंजन की सरकार भी दूर नहीं कर पा रही गरीबी
एक पूरा अमला नगर निगम में काम कर रहा है। कमिश्नर के अलावा कई सहायक आयुक्त है, इंजीनियर है लेकिन शहर के वार्डों में कब्जे हो रहे हैं। सड़के अतिक्रमण से भरी हुई हैं लेकिन नगर निगम तो नेताओं के इशारों पर चल रहा है। इस शहर में अगर किसी आम आदमी का काम हो तो उसको भी एक नेता की एप्रोच लगाना जरूरी हो जाता है । नगर निगम जिस गरीबी के दौर से गुजर रहा है इस गरीबी को दूर करने का वादा विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा उपचुनाव में नेताओं ने किया था। नगर निगम को जोड़ दिया जाए तो केंद्र में भाजपा की सरकार है, मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है , शहर में अब सांसद भाजपा के विवेक बंटी साहू है। और नगर निगम की परिषद भी भाजपा की है। उसके बाद भी चार इंजन की सरकार नगर निगम को गरीबी से नहीं उबार पा रही है। नगर निगम जमीन बेचने की तैयारी कर रहा है और गुपचुप तरीके से रसूखदारों को जमीन बेच भी रहा है । नगर निगम का पूरा मामला अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर दिखाई दे रहा है।
संपादकीय…avinash singh
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