नगर निगम के अधिकारियों की कारगुज़ारी, सब सेट है
सतीजा की जमीन पर नाला नियमों का खुला उल्लंघन
छिंदवाड़ा। शहर में तात्कालिक नगर नगर पालिका ने 1997- 98 में देव होटल के पास की एक जमीन जिसका रकबा लगभग 12600 वर्ग फुट है। इस जमीन को नर्सरी के उपयोग के लिए लीज पर दिया था। इस जमीन पर कभी ना नर्सरी बनी और ना लीज का रिनुअल हुआ। यह लीज भी टेंपरेरी थी जो 5 साल बाद खत्म हो गई। लेकिन उसके बाद भी आज वह जमीन जिसकी कीमत करोड़ों रुपए में है। वह जमीन चंद रूपों में नगर निगम ने इस रसूखदार को बेच दी। जिनको नर्सरी बनाने के लिए यह जमीन लीज पर दी गई थी। या मामला है सतीजा की जमीन का जो 97- 98 में नर्सरी बनाने के लिए दी गई और उसके बाद 2017 में जमीन को वापस हैंडोवर करने का आदेश नगर निगम ने दिया। लेकिन बाद में कमलनाथ सरकार बनी और रसूखदार के नाम महज 28 लाख रुपए में जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। जबकि 2020 में हुई इस रजिस्ट्री के समय भी जमीन की कीमत करोड़ों में थी।
यह गोलमाल 2014 से लगातार चला रहा था। नगर निगम के अधिकारी इसमें शामिल रहे और ऐसा नहीं है कि आज भी नगर निगम के अधिकारी इस मामले में शामिल नहीं है। दरअसल नगर निगम के अधिकारियों ने अब इस जमीन पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाने की अनुमति दे डाली । वह भी आधे शहर का सीवरेज बाहर निकलने वाले नाले पर। यहां कंस्ट्रक्शन हो रहा है और नगर निगम के अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हुए हैं। हमने लगातार इस मामले में पांच एपिसोड बनाए और अब छठवां एपिसोड आपके सामने है। कैसे इस जमीन पर जो करोड़ों रुपए की थी जिसको कौड़ियों के दाम बेचा गया और अब यहां पर मल्टी स्टोरी कंस्ट्रक्शन चल रहा है।
जमीन के मालिक की मृत्यु हो चुकी अब नामांतरण प्रक्रिया में
नगर निगम ने यह जमीन शहर के एक रसूखदार वीरेंद्र सतीजा को 1997- 98 के गाइडलाइन के हिसाब से बेच दी । उस हिसाब से महज 28 लाख रुपए जमीन की कीमत आ रही थी । 12600 वर्ग फीट जमीन जो अब मेडिकल कॉलेज के बाजू में मौजूद है इस जमीन की कीमत करोड़ों में है। पहले तो नगर निगम ने 2017 में जमीन की लीज को पूरी तरह से कैंसिल कर दिया। लेकिन बाद में न्यायालय में इस मामले में गोलमाल किया गया और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते न्यायालय में लोक अदालत में एक सरकारी जमीन का समझौता किया गया जो की करोड़ों की थी। जबकि लोक अदालत में ऐसी किसी जमीन के समझौते से पहले सरकार की अनुमति लेना आवश्यक था। जो कि नगर निगम के अधिकारियों ने नहीं ली । और तात्कालिक कमिश्नर इच्छित गड़पाले और अधिकारी बघेल ने पूरा गोलमाल किया । गोलमाल सिर्फ इतना नहीं था की जमीन की रजिस्ट्री वीरेंद्र सतीजा के नाम कर दी गई। बल्कि गोलमाल यह भी था कि करोड़ों की जमीन को 28 लाख रुपए में बेच दिया गया। अब वीरेंद्र सतीजा की मृत्यु हो चुकी है और इस जमीन के नामांतरण का मामला प्रक्रिया में है।
गोलमाल… Avinash Singh
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