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Suicide mystery : इंजीनियर की दर्दनाक खुदकुशी और विवाहिता की मौत का क्या है राज ?

चन्दनगांव क्षेत्र के दोनों मामले बने संदिग्ध, जांच में खुलेंगे राज

क्या है मौत को गले लगाने का कारण, जानना भी है जरूरी

छिंदवाड़ा। पिछले एक हफ्ते में शहर में हुए दो आत्महत्या के मामले रहस्य बनकर रह गए। आखिर ऐसा क्या कारण था कि एक इंजीनियर जिसके पास पैसों की कमी नहीं थी। एक बेहतरीन जिंदगी जी रहा था। एक शानदार कॉलोनी में रह रहा था। भरा पूरा परिवार छोड़कर उसने दर्दनाक मौत को गले लगाया। यह मामला चंदनगांव की वर्धमान कॉलोनी का है। वही एक दूसरा मामला भी चंदनगांव से जुड़ा हुआ है। जिसमें 30 साल की विवाहित महिला ने फांसी के फंदे पर झूल कर मौत को गले लगा लिया। यह दोनों ही मामले अनसुलझे हैं और दोनों ही मामलों में कई समानता है। आज हम इन दोनों मामलों के रहस्य पर चर्चा करेंगे कि आखिर सुसाइड के पीछे का रहस्य क्या है। दोनों ही घटनाओं पर चर्चा का बाजार भी गर्म है। इसका कारण यह है कि हेमंत पवार जिस समाज के जिला अध्यक्ष थे इस समाज से वह महिला भी आती थी जिसने 23 दिसंबर को फांसी के फंदे पर झूल कर अपनी ईहलीला समाप्त कर ली।

इंजीनियर हेमंत पवार ने लगाया दर्दनाक मौत को गले

Second suicide – चंदन गांव की वर्धमान कॉलोनी में रहने वाले 51 वर्षीय इंजीनियर हेमंत पवार परिवार से संपन्न, कारोबार से संपन्न और एक बेहतरीन परिवार के व्यक्ति थे। जिले भर के क्रेशर में उनका ब्लास्टिंग का काम था। इसके अलावा वर्धमान के ही अपने एक साथी के साथ क्रेशर में उनके पार्टनरशिप भी थी। कहीं से भी ऐसी स्थिति नहीं थी कि हेमंत पवार खुद या उसका परिवार रुपयों की कमी से जूझ रहा हो। लेकिन हेमंत पवार ने अचानक 24 दिसंबर की सुबह मौत को गले लगा लिया। वह भी एक ऐसी दर्दनाक मौत जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। दरअसल हेमंत पवार आत्महत्या की तैयारी पिछले तीन दिनों से कर रहा था। इसके पीछे कारण क्या था यह रहस्य तो जांच में खुलेंगे । लेकिन जिस जगह पर हेमंत ने ट्रेन के सामने पटरी पर लेट कर जान दी। उस जगह पर हेमंत पिछले तीन दिन से जा रहा था।

24 दिसंबर को आत्महत्या करने के पहले 22 दिसंबर और 23 दिसंबर को भी हेमंत उसी जगह पर देखा गया जहां पर उसने आत्महत्या की। इसके पहले 21 दिसंबर को हेमंत ने अपने घर में ही अपना मोबाइल तोड़ दिया.. क्यों ? यह सबसे बड़ा सवाल है। उसके बाद तीन दिनों तक आत्महत्या की तैयारी हेमंत क्यों करता रहा। यह भी सवाल खड़ा हो रहा है। हालांकि हेमंत ने आत्महत्या करने के पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें उसने अपने परिवार के लिए स्पष्ट लिखा है कि वह अपनी मर्जी से कर रहा है और उसका जिससे भी लेना-देना है। उसको उसके रुपए दे दिए जाएं और जिसे लेना है उनके उनसे रुपए ले लिए जाए। इस तरह की बड़ी सोची समझी योजना के तहत हेमंत पवार ने आत्महत्या की है।

बच्चे को स्कूल भेजकर फांसी पर झूली विवाहिता

First suicide – चंदनगांव में ही आत्महत्या का दूसरा मामला पंप हाउस कॉलोनी चंदन गांव का है। जिसमें 30 वर्षीय महिला ने इंजीनियर हेमंत पवार की मौत के ठीक एक दिन पहले 23 दिसंबर को अपने घर में उस समय फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली जब उसका पति और बच्चा बाहर गए हुए थे। यह मामला भी अब तक मौत के रहस्यों से भरा हुआ है। इसका कारण यह है कि यह महिला भी उसी समाज से आती है जिस समाज का अध्यक्ष हेमंत पवार था। और इस महिला ने ठीक 1 दिन पहले खुदकुशी की। जबकि यह महिला भी संपन्न परिवार से थी। महिला का पति बिजली विभाग में जेई पद पर पदस्थ है। और हाल ही में इस परिवार ने बीबीसी कॉलोनी में एक प्लॉट खरीदा है।

23 दिसंबर की सुबह 10:00 बजे मृतिका नीतू बुबाडे पति मनोज बुबाडे ने अपने 5 साल के बेटे को स्कूल जाने के लिए तैयार किया । जब उसका पति बच्चे को छोड़ने के लिए निकल गया । तब महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली । इस बात का पता पति को तब लगा जब वह बच्चे को छोड़कर वापस लौटा। पुलिस के अनुसार 21 दिसंबर को महिला और उसके पति के बीच विवाद हुआ था। विवाद का कारण महिला के पति ने यह बताया कि वह अपने पैतृक घर सिमरिया गया हुआ था और लेट आने की बात पर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। इसके अलावा उसके पति का यह भी कहना है कि कुछ दिनों से महिला डिप्रेशन से गुजर रही थी। हालांकि यह केवल एक पक्ष है जो महिला की मौत के बाद पति ने पुलिस को बयान दिया है। यहां एक बात गौर करने वाली है कि जिस दिन महिला के पति और उसकी पत्नी का आपस में विवाद हुआ।

उसके दूसरे ही दिन से हेमंत पवार की खुदकुशी की प्लानिंग शुरू हो गई। उसी दिन हेमंत पवार ने अपने घर में अपना मोबाइल तोड़ दिया था। जिसका कारण आज तक पता नहीं चल सका। हालांकि कुछ चर्चा यह भी है कि मृतिका नीतू वर्धमान कॉलोनी में रहना चाहती थी। और इसलिए पति के साथ वह विवाद कर रही थी कि प्लॉट वर्धमान कॉलोनी में ही लिया जाए। जबकि उसके पति ने कुछ दिन पहले ही बीबीसी कॉलोनी में प्लाट ले लिया था। एक बड़ा सवाल महिला की मौत के बाद जो सामने आया वह यह है कि महिला का अंतिम संस्कार उसके पति के पैतृक निवास में नहीं हुआ। बल्कि महिला के मायके में हुआ। हालांकि इस पूरे मामले में किसी ने कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं लगाया । लेकिन रहस्य अब भी बरकरार है कि आखिर महिला ने आत्महत्या क्यों कि और उसका अंतिम संस्कार उसके मायके में क्यों हुआ।

पुलिस ने आज तक साइबर सेल को नहीं भेजे फोन नंबर !

रहस्यमई आत्महत्या के दोनों ही मामलों में पुलिस की जांच पर भी सवाल उठने लगे हैं। कि आखिर पुलिस आत्महत्या के मामलों में केवल बयानों के आधार पर फाइल बंद करने की जल्दबाजी में क्यों लगी हुई है। यह दोनों ही मामले गंभीर है और इन मामलों में इस बात का खुलासा होना जरूरी है कि आखिर आत्महत्या करने वालों ने आत्महत्या क्यों की है। या ये भी हो सकता है जिसे आत्महत्या समझा जा रहा हो वह सोची समझी हत्या हो ? आज के दौर में पुलिस की जांच बड़ी आसान हो चुकी है। एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी पुलिस ने हेमंत पवार, नीतू बुबाडे और उसके पति के मोबाइल नंबर और उनके सोशल मीडिया अकाउंट की जांच नहीं की। पुलिस की जांच अभी इस मामले में पीछे चल रही है। दोनों की मौत का कारण उनके मोबाइल कॉल्स डिटेल और सोशल मीडिया अकाउंट से बाहर निकल सकता है। लेकिन पुलिस की जांच ऐसे मामलों में चिंताजनक है। हो सकता है की मौत का कारण ऐसा हो जिसे जानना हर शहरी के लिए जरूरी हो और वह सतर्क हो सके।

Suicide connection… Avinash Singh
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