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मेडिकल कॉलेज : दो डॉक्टर पत्नियों के गर्भपात, गर्भ में पल रहे बच्चे भी सुरक्षित नहीं !

मेडिकल कॉलेज परिसर डॉक्टर और उनके परिवार के बुरे हाल

बहुमंजिला आवासीय इमारत की लिफ्ट सालों से बंद बुजुर्ग क़ैद

छिंदवाड़ा। मेडिकल कॉलेज और निर्माणाधीन सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का सरकार का दावा मेडिकल कॉलेज में ही दम तोड़ता नजर आ रहा है। छिंदवाड़ा सहित आसपास के जिलों के लिए मेडिकल कॉलेज की सुविधा बेहतर बनाने के लिए सरकार ने कई दावे किए हैं। छिंदवाड़ा का मेडिकल कॉलेज अब 5 साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा कर चुका है। लेकिन यहां के डॉक्टर और उनका परिवार ही लापरवाही का शिकार होते चले जा रहे। मेडिकल कॉलेज परिसर में जहां डॉक्टरों के लिए आवास बनाए गए हैं। उन आवासों में रहने वाले चिकित्सकों की पत्नियों के गर्भपात हो रहे हैं। बुजुर्गों के घुटने खराब हो रहे हैं और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन आंख बंद किए हुए बैठा है। हम बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज की जहां पर मेडिकल कॉलेज परिसर में ही चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर सह प्रोफेसर के लिए चार बहुमंजिला आवासीय ब्लॉक बनाए गए है। ब्लॉक ए से लेकर ब्लॉक बी तक हर ब्लॉक में 16-16 फ्लैट है।

इस बहुमंजिला आवासीय भवन में रहने वाले चिकित्सकों की पत्नियों के गर्भपात हो रहे हैं। पिछले दिनों दो चिकित्सा विशेषज्ञों के पत्तियों के असमय ही गर्भपात हो गए। और इसके पीछे का कारण यह है की मेडिकल कॉलेज प्रबंधन आवासीय भवन का रखरखाव नहीं कर पा रहा है। ए ब्लॉक से लेकर डी ब्लॉक तक हर ब्लॉक में लिफ्ट मौजूद है। लेकिन यह लिफ्ट कई सालों से बंद है। चार मंजिला इमारत में नीचे से लेकर ऊपर चढ़ने तक चिकित्सक और उनके परिवार परेशान हो गए हैं। सबसे ज्यादा समस्या गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की है। और यह महिलाएं आम नहीं है बल्कि उन चिकित्सकों की पत्नियां हैं जो पूरे जिले के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की बात करते हैं। जबकि इन्हीं चिकित्सकों का परिवार लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है और गर्भ में पल रहे नवजातों की मौत हो रही है।

दहशत में परिवार : दो डाक्टरों की पत्नियां अब भी गर्भवती !

मेडिकल कॉलेज परिसर में बने बहु मंजिला आवासीय भवन में रहने वाले डॉक्टर और उनके परिवार दहशत में हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पिछले दिनों दो डॉक्टरों के यहां गर्भपात हो गया। उन्हें बार-बार अपने फ्लैट से नीचे उतारना और ऊपर चढ़ना पड़ रहा था । जबकि लिफ्ट बंद है कई बार आवेदन देने के बाद भी लिफ्ट चालू नहीं कराई गई है। इस समस्या से चिकित्सकों के परिवार दहशत में है। वर्तमान में भी दो डॉक्टर ऐसे हैं जिनकी पत्नियां गर्भवती है। लेकिन वह लेकिन अब परिवार इन महिलाओं को बिल्डिंग में नीचे नहीं ला पा रहा है। क्योंकि लिफ्ट बंद है। दोनों ही गर्भवती महिलाएं अपने घरों में कैद होकर रह गई है। यही हाल बुजुर्गों का भी है जिन चिकित्सकों का पूरा परिवार यहां रहता है। उनके घर के बुजुर्ग भी घरों में कैद होकर रह गए हैं। क्योंकि चार मंजिल सीढियां चढ़ना और उतरना उनके बस में नहीं है। उनकी हालत और ज्यादा खराब हो जाती इसीलिए यह बुजुर्ग भी अपने फ्लैट में कैद है।

जन सुनवाई, हर कोई कतार में लेकिन डॉक्टर कैसे जाएं

सरकार हफ्ते में एक दिन जनसुनवाई करती है और पूरे जिले से लोग कलेक्टर से लेकर नीचे मौजूद अधिकारियों तक अपनी समस्या लेकर पहुंचते हैं। समस्याएं भी सुलझाई जाती हैं। इतना ही नहीं सरकार ने मुख्यमंत्री से शिकायत करने के लिए सीधे सीएम हेल्पलाइन 181 का टोल फ्री नंबर भी जारी किया है। इस पर भी जिले भर से हजारों शिकायत हर महीने पहुंचती हैं। लेकिन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर किस से शिकायत करें और कौन उनकी समस्या का निराकरण करेगा। क्योंकि मेडिकल कॉलेज सीधे-सीधे मेडिकल डीन के अंडरटेकन है और मेडिकल कॉलेज के अंदर होने वाली किसी भी समस्या के लिए डीन जिम्मेदार हैं। प्रशासक होने के नाते सभी समस्याओं का निराकरण डीन को करना है। बड़ी विडंबना है कि एक तरफ बीमार और लाचारों की मदद करने वाले डॉक्टर आज खुद लाचारी की कगार पर खड़े।

इधर जूनियर डॉक्टर कर रहे सुरक्षा की मांग, दिया धरना

इधर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा प्रोफेसर अपनी समस्या से परेशान है और उधर जिला चिकित्सालय सह मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर अपनी सुरक्षा को लेकर दहशत में है। जूनियर डॉक्टरों ने आंदोलन की राह अपना ली और अब वह जिला चिकित्सालय में काम के दौरान सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से कई मांगे रखी है जिसमें से प्रमुख मांग उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना। पिछले दिनों गायनिक वार्ड में एक महिला की ऑपरेशन टेबल में मौत होने के बाद जमकर हंगामा हुआ। बताया जाता है कि इस मामले में कुछ बाहरी तत्व भी शामिल थे जो विवाद को भड़काने में लगे हुए थे। इसी दौरान जब गायनिक वार्ड में हंगामा चल रहा था तभी चिकित्सकों के साथ अभद्रता और मारपीट तक बात पहुंच गई। इतना ही नहीं इस हंगामा के दौरान कई गर्भवती महिलाएं भी गंभीर रूप से बीमार हो गई ।जिन्हें संभालने में चिकित्सकों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ गया।

लाचार चिकित्सक… Avinaash Siingh
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